वार्डपंच – एक व्‍यंगकथा

Written by Wiki Bharat Team

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Comedy Story in Hindi: कहानी की शुरुआत हो तो हंसी से ही हो, ऐसा हमारा मानना है। ‘वार्डपंच’ एक हास्यप्रद कहानी है, जिसमें हर कदम पर हंसी का सफर है। इस कहानी में हम एक छोटे से गाँव के वार्डपंच की किसी बेहद हास्यप्रद साहसिकता को देखेंगे। 

इस कॉमेडी व्‍यंगकथा के माध्यम से हम सभी को एक मनोहर यात्रा पर ले जाएंगे, जहां हर कोने से हंसी की बूंदें बरसेंगी। वार्डपंच के मजेदार किस्से और उनकी कुछ बातें हमें हंसी में डाल कर आपको हंसी के साथ दिल खोलकर हंसने का आनंद देंगी।

आइए, हम सभी मिलकर ‘वार्डपंच’ एक Comedy Story in Hindi के मजेदार दुनिया में सफल होकर रहे।

Comedy Story in Hindi

Comedy Story in Hindi – वार्डपंचों के चुनाव का समय चल रहा था। एक बार फिर नेता, अभिनेता बने हुए घर-घर जाकर जनता के चरण स्‍पर्श कर रहे थे।

पिछली बार के वार्डपंच बन चुके मकरसिंह ने इस बार अपनी धर्म पत्‍नी को मैदान में उतारा था क्‍योंकि सरकार ने नया कानून जो बना दिया था कि वार्डपंच के चुनाव केवल दसवीं पास व्‍यक्ति ही लड सकता है। अब खुद तो सातवी फेल थे इसलिए इस बार चुनाव का पर्चा भर नहीं सकते थे लेकिन पत्‍नी मिल गई थी दसवीं पास। इसलिए इस बार पत्‍नी की किश्‍ती में सवार होकर ही अपनी नैया को पार लगाना था।

अपनी पत्‍नी और अपने काफिले के साथ गली से गुजरते हुए मकरसिंह, बुधना किसान के दरवाजे पर पहुंचे। बुधना किसान की पत्‍नी से दरवाजा खोला। मकरसिंह की पत्‍नी ने बुधना की पत्‍नी के पैर छुए और आर्शीवाद मांगा। मकरसिंह ने पूछा- बुधना भैया कहां हैं?

बुधना की पत्‍नी ने बताया कि- वो तो बीमार हैं… सरकारी अस्‍पताल में भर्ती हैं… मलेरिया हो गया है, उन्‍हें…

मकरसिंह ने चौंकने का अभिनय करते हुए कहा- इश्पिताल में भर्ती हैं? हमारे वार्ड में इतनी बडी घटना हो गई और हमको पता ही नहीं… हम अभी इश्पिताल जाऐंगे…

वैसे तो पिछले पांच सालों में इसी वार्ड में कम से कम 50 लोग तो स्‍वर्ग सिधारे ही होंगे। वो बडी घटना नहीं थी लेकिन चुनावों के समय मजाल है कि प्रजा को कोई तकलीफ हो जाए।

मकरसिंह अपने लाव-लश्‍कर के साथ Government Hospital पहुंच गए। देखा तो एक बेड पर बुधना लेटा हुआ था। जाते ही उसका हाल-चाल पूछने लगे। पास ही के छोटे से Table पर Glucose, Drip, Injection, दवाईयां वगैरह रखी हुई थीं। मकरसिंह ने शिकायत-भरे लहजे में कहा- इतनी बडी बात हो गई…हमें याद भी नहीं किया?

पास के बेड पर लेटे हुए दूसरे मरीज ने चुटकी लेते हुए कहा- बीमारी में भगवान को याद करते हैं, यमराज को नहीं।

कई लोग हंसने लगे। मकरसिंह ने घूमकर उस व्‍यक्ति की ओर देखा, जो कि उसी के वार्ड का था और पिछले साल के चुनाव में विपक्षी पार्टी के टिकट पर उसी के सामने खडा था और मकरसिंह को मुश्किल से ही जीतने दिया था। मकरसिंह ने उसके मुंह लगना ठीक नहीं समझा और फिर से बुधना की ओर देखते हुए कहने लगा- गोली-वोली खाने से कुछ ना होगा… सुई लगवाओ… सुई…। 

बुधना ने कहा- हां भैया। ग्‍लुकोस की बोतल में सुई लगा रहे हैं।

मकरसिंह ने कहा- बोतल में सुई लगेगा, तो क्‍या होगा… बोतल ही ठीक होगा ना… सुई डीरेक्‍ट तुमको ही लगना चहिए। डॉक्‍टर कहां है, हम उससे बात करते हैं।

इतने में डॉक्‍टर भी आ गया। मकरसिंह ने उससे कहा- इसको सुई काहे नहीं लगाते हो।

डॉक्‍टर को तो ऐसे लोगों की आदत ही पडी हुई थी इसलिए Injection की सुई और Drip वाली सुई दिखाते हुए कहा- यह Drip वाली सुई ज्‍यादा बडी है, इसलिए ज्‍यादा फायदा करेगी।

मकरसिंह को बात समझ में आ गई। इतने में बुधना अपने बेड से उठने लगा, तो मकरसिंह ने उसे दबाकर फिर से सुला दिया और बोला- तुमको उठने की जरूरत नहीं है… जो भी काम है, बोलो… हम करेंगे… नहीं तो हमारे चमच… मतलब हमारे कार्यकर्ता करेंगे।

बुधना ने सबसे छोटी उंगली बताकर एक नम्‍बर जाने का ईशारा किया और आराम से लेट गया। अब मकरसिंह धर्मसंकट में पडकर अपने कार्यकर्ताओं की ओर देखने लगा और फिर सिर खुजाते हुए बोला-

इसके लिए तो तुमको ही जाना पडेगा। 

और दो कार्यकर्ताओं को ईशारा किया। उन्‍होंने तुरन्‍त बुधना को सहारा देकर उठाया और टॉयलेट की ओर चल दिए।

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इतने में तीन-चार गाडियां Hospital के बाहर आकर रूकीं और उसमें से मकरसिंह की पार्टी के MLA साहब उतरे। उनके साथ Security का पूरा Staff था। मकरसिंह के पास खडे सारे कार्यकर्ता MLA के पास चले गए और जिन्‍दाबाद के नारे लगाने लगे। इसी दौरान बुधना भी टॉयलेट से वापस आ चुका था। अभी वह बेड पर बैठने ही वाला था कि मकरसिंह उसके पास आया और बोला- बुधना भाई… MLA साहब के स्‍वागत के लिए कुछ फल-फ्रूट लाना पडेगा।

बुधना ने कहा- अभी ले आया… भैया…

और कमजोरी की हालत में ही वह फल लेने चला गया।

MLA ने मकरसिंह के कान में कहा कि- मकरसिंह… इस बार हम तुम्‍हें टिकट नहीं दे पाऐंगे।

मकरसिंह सन्‍न रह गया- क्‍या बात करते हो माई-बाप… राजनीति से ही तो हमारा गुजारा चलता है… भूखे मर जाऐंगे हम… दिन-रात हम जनता की सेवा करते हैं… ये देखो… हम अपने वार्ड के इस आदमी की सेवा करने आए हैं…

कहते हुए बेड की ओर ईशारा किया, फिर याद आया कि बुधना को तो फ्रूट लेने भेजा है, सो बोला- ये इस बेड पर लेटा मरीज हमारे वार्ड का है… अभी बाहर गया है… आते ही हम उसकी सेवा शुरू कर देंगे…

MLA ने धीरे से समझाया- देखो… हर क्षैत्र में एक-दो वार्ड हमारे कमाने के लिए होते हैं। इस बार तुम्‍हारे वार्ड से टिकट अच्‍छे दाम में बिक रहा है… तुम चिन्‍ता ना करो… तुम्‍हे भी उसमें से मिल जाएगा… 

मकरसिंह तो इस बार आस लगाए बैठा था कि उसकी बीवी को चेयरमेन का पद मिल जाएगा। चेयरमेन तो छोडो, पार्षद का पद भी चला गया।

MLA साहब अपनी बात कह कर जा चुके थे और जैसे ही मकरसिंह के चमचों को ये बात पता चली कि मकरसिंह का पत्‍ता कट चुका है, एक-एक करके वे सभी भी खिसक लिए। इतने में हांफते-हांफते बुधना फ्रूट लेकर आ गया। फ्रुट को टेबल पर रखकर देखा तो उसके बेड पर मक‍रसिंह बेहोश सा पडा था। बुधना ने उसे हिलाया-डुलाया मगर वो नहीं हिला। बुधना तुरन्‍त डॉक्‍टर के पास गया और डॉक्‍टर को सारी बात बताई। डॉक्‍टर दौडा-दौडा आया, मकरसिंह की नब्‍ज टटोली और आनन-फानन में मकरसिंह को ICU डालना पडा। छ: घण्‍टे बाद मकरसिंह को होश आया तो उसने सारी घटना बताई कि-

बुधना बाहर गया था, हम थोडे टेन्‍शन में थे, सो बुधना के बेड पर ही निढाल होकर पड गए… करने को कुछ था नहीं, सो झपकी लग गई… तभी आपका कम्‍पाउण्‍डर आकर सुई लगाकर चला गया।

डॉक्‍टर ने अपना सिर पीट लिया। उसने बुधना से कहा- इन्‍हें तुम्‍हारा मलेरिया का हाईपावर वाला इंजेक्‍शन लग गया है… दो दिन एडमिट रहेंगे… तब तक तुम इनका ध्‍यान रखना…

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